ईकॉमर्स लाभ शब्दावली
A
- ACOS
- विज्ञापन लागत पर बिक्री (ACOS) आपके विज्ञापन खर्च को उस बिक्री से तुलना करता है जो विज्ञापनों से हुई है। इसे प्रतिशत में मापा जाता है। अगर आपका ACOS 25% है, तो इसका मतलब है कि हर 100 रुपये की बिक्री पर आप 25 रुपये विज्ञापन पर खर्च कर रहे हैं।
- e.g. मान लीजिए आपने 5,000 रुपये का विज्ञापन खर्च किया और उससे 20,000 रुपये की बिक्री हुई। आपका ACOS = (5,000 / 20,000) × 100 = 25% होगा। अगर आपका ACOS 30% से ज्यादा है, तो आपके विज्ञापन का प्रदर्शन खराब माना जाता है।
C
- chargeback
- चार्जबैक वह प्रक्रिया है जिसमें ग्राहक अपने बैंक या पेमेंट गेटवे के माध्यम से किसी लेनदेन को विवादित करता है और अपने पैसे वापस ले लेता है। यह आमतौर पर तब होता है जब ग्राहक को लगता है कि उत्पाद दोषपूर्ण था, डिलीवरी में देरी हुई थी, या लेनदेन में धोखाधड़ी हुई थी।
- e.g. मान लीजिए आपने एक ग्राहक को 2,000 रुपये का उत्पाद भेजा। ग्राहक को उत्पाद पसंद नहीं आया और उसने अपने बैंक से लेनदेन को विवादित कर दिया। बैंक ने आपकी ओर से 2,000 रुपये वापस कर दिए और आपको 500 रुपये का शुल्क भी देना पड़ा। चार्जबैक से न केवल आपको पैसे का नुकसान होता है, बल्कि आपका विक्रेता खाता भी प्रभावित हो सकता है।
F
- FBA फीस
- Amazon द्वारा 'Fulfillment by Amazon' सेवा के लिए ली जाने वाली फीस, जिसमें स्टोरेज, पैकेजिंग, और शिपिंग शामिल हैं। ये फीस उत्पाद के आकार, वजन, और स्टोरेज समय पर निर्भर करती हैं।
- e.g. एक 500 ग्राम के उत्पाद के लिए FBA फीस 80 रुपये हो सकती है, जबकि बड़े उत्पाद के लिए 150 रुपये तक जा सकती है।
R
- ROAS
- विज्ञापन पर रिटर्न (ROAS) यह बताता है कि विज्ञापन पर खर्च किए गए हर रुपये के बदले आपको कितने रुपये की बिक्री हुई। इसे अनुपात के रूप में लिखा जाता है, जैसे 4:1 या 5:1।
- e.g. अगर आपने 1,000 रुपये का विज्ञापन खर्च किया और उससे 5,000 रुपये की बिक्री हुई, तो आपका ROAS 5:1 होगा। इसका मतलब है कि हर रुपये के विज्ञापन पर आपको 5 रुपये की बिक्री मिली। ROAS जितना ज्यादा होगा, उतना अच्छा माना जाता है।
- refund rate
- रिफंड दर वह प्रतिशत है जो बताता है कि आपके कुल ऑर्डरों में से कितने ऑर्डरों को ग्राहकों ने वापस किया। इसे प्रतिशत में मापा जाता है। अगर आपकी रिफंड दर 5% है, तो इसका मतलब है कि हर 100 ऑर्डरों में से 5 ऑर्डरों को वापस किया गया।
- e.g. पिछले महीने आपके पास 2,000 ऑर्डर आए और 100 ऑर्डरों को वापस किया गया। आपकी रिफंड दर = (100 / 2,000) × 100 = 5% होगी। अगर आपकी रिफंड दर 10% से ज्यादा है, तो आपको अपने उत्पाद की गुणवत्ता, पैकेजिंग या ग्राहक सेवा पर ध्यान देने की जरूरत है।
S
- SKU
- स्टॉक कीपिंग यूनिट (SKU) एक उत्पाद की विशिष्ट पहचान होती है जिसे स्टॉक ट्रैक करने, ऑर्डर पूरा करने और इन्वेंट्री मैनेज करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह उत्पाद के रंग, आकार, मॉडल या अन्य विशेषताओं से मिलकर बनता है।
- e.g. मान लीजिए आप एक टी-शर्ट बेचते हैं। आपके पास नीले रंग की टी-शर्ट, M साइज और L साइज में उपलब्ध है। तो आपके SKU कुछ इस तरह हो सकते हैं: TS-BLUE-M और TS-BLUE-L। इससे आपको पता चलता है कि कौन सा स्टॉक खत्म हो रहा है या कौन सा उत्पाद सबसे ज्यादा बिक रहा है।
इ
- इन्वेंटरी टर्नओवर
- कितनी बार आपका स्टॉक बिकता और रिप्लेस होता है। इसे सालाना या मासिक आधार पर कैलकुलेट किया जाता है। ज्यादा टर्नओवर का मतलब है कि स्टॉक तेजी से बिक रहा है, कम टर्नओवर का मतलब है कि स्टॉक जम रहा है।
- e.g. पिछले साल हमारे पास औसतन ₹5 लाख का स्टॉक था और सालाना बिक्री ₹20 लाख रही। इसका मतलब हुआ इन्वेंटरी टर्नओवर 4 बार हुआ। लेकिन इस साल टर्नओवर गिरकर 2.5 रह गया है, इसलिए हमें स्टॉक कम करना होगा।
ए
- एड स्पेंड
- अमेज़न पर विज्ञापन चलाने पर किया गया खर्च, जिसमें स्पॉन्सर्ड प्रोडक्ट, स्पॉन्सर्ड ब्रांड और डिस्प्ले एड्स शामिल हैं। यह सीपीसी (क्लिक पर लागत) या सीपीएम (हज़ार इम्प्रेशन पर लागत) के आधार पर लिया जाता है। उदाहरण के लिए, अगर आप ₹10,000 का एड स्पेंड करते हैं और उससे ₹50,000 की बिक्री होती है, तो आपका एसीओएस (एडवरटाइजिंग कॉस्ट ऑफ सेल) 20% है।
- e.g. हमने जनवरी में एड स्पेंड ₹15,000 किया, लेकिन फरवरी में ACOS 35% तक चला गया। हमने कीवर्ड टारगेटिंग बदली और मार्च में ACOS घटाकर 22% कर लिया।
क
- कंट्रीब्यूशन मार्जिन
- प्रॉडक्ट की बिक्री से मिलने वाली आय में से वेरिएबल कॉस्ट (जैसे मैन्युफैक्चरिंग, शिपिंग, रेफरल फीस) घटाने के बाद बचा हुआ पैसा। यह दिखाता है कि आपका प्रॉडक्ट कितना मुनाफा दे रहा है।
- e.g. हमारे SKU B07X की बिक्री ₹1,500 प्रति यूनिट है, लेकिन ₹800 लैंडेड कॉस्ट, ₹120 अमेज़न रेफरल फीस, और ₹50 पैकेजिंग मिलाकर कुल वेरिएबल कॉस्ट ₹970 है। इसका कंट्रीब्यूशन मार्जिन ₹530 प्रति यूनिट है, जो 35% है।
न
- निवल लाभ
- विक्रय के बाद बचा हुआ वह धन जो सभी खर्चों, करों, और शुल्कों को घटाने के बाद मिलता है। इसे 'अंतिम लाभ' भी कहते हैं।
- e.g. अगर आपने 1,00,000 रुपये बेचे, COGS 40,000 रुपये था, FBA फीस 12,000 रुपये लगी, और अन्य खर्च 20,000 रुपये हुए, तो निवल लाभ = 1,00,000 - 40,000 - 12,000 - 20,000 = 28,000 रुपये।
- नकदी प्रवाह
- बिजनेस में आने और जाने वाले पैसे का हिसाब। अगर आने वाले पैसे ज्यादा हैं, तो नकदी प्रवाह पॉजिटिव है। अगर जाने वाले पैसे ज्यादा हैं, तो नकदी प्रवाह नेगेटिव है। इसे हर महीने ट्रैक करना ज़रूरी है।
- e.g. अप्रैल में हमारे ₹1.2 लाख बिक्री हुई, लेकिन ₹90,000 स्टॉक खरीदने और ₹30,000 वेयरहाउस किराया देने के बाद सिर्फ ₹5,000 बचे। नकदी प्रवाह नेगेटिव रहा। मई में स्टॉक कम किया तो स्थिति सुधर गई।
प
- पे-आउट
- वह रकम जो प्लेटफॉर्म (जैसे अमेज़न, फ्लिपकार्ट) आपके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करता है। इसमें से प्लेटफॉर्म फीस, टैक्स और अन्य कटौतियां पहले ही काट ली जाती हैं।
- e.g. अमेज़न ने इस महीने ₹1,20,000 का पे-आउट भेजा था, लेकिन ₹18,000 रेफरल फीस, ₹5,000 FBA फीस, और ₹3,000 जीएसटी काटने के बाद सिर्फ ₹94,000 हमारे अकाउंट में आए। अगले महीने से हमने पे-आउट साइकल 14 दिन से घटाकर 7 दिन करवा लिया है।
- परिचालन व्यय
- कंपनी चलाने के लिए होने वाले नियमित खर्चे जैसे कि वेयरहाउस किराया, कर्मचारियों का वेतन, विज्ञापन, और शिपिंग फीस। ये सीधे उत्पादन से नहीं जुड़े होते, लेकिन बिजनेस चलाने के लिए ज़रूरी होते हैं।
- e.g. हमने मार्च में वेयरहाउस बदल लिया था, जिससे किराया ₹12,000 से बढ़कर ₹18,000 हो गया। साथ ही, नए कर्मचारियों को रखने से वेतन खर्च ₹25,000 बढ़ा। कुल परिचालन व्यय ₹43,000 तक पहुंच गया।
फ
- फुलफिलमेंट फीस
- अमेज़न द्वारा ऑर्डर पूरा करने के लिए लिया जाने वाला शुल्क, जिसमें पैकिंग, शिपिंग, ग्राहक सेवा और रिटर्न प्रोसेसिंग शामिल है। यह उत्पाद के वजन, आकार और गंतव्य पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, एक 500 ग्राम का पैकेट अगर स्टैंडर्ड साइज का है, तो फुलफिलमेंट फीस ₹45 होती है, जबकि ओवरसाइज्ड के लिए ₹120 तक जाती है।
- e.g. हमने मार्च में फुलफिलमेंट प्रोवाइडर बदला और फीस ₹55 से घटाकर ₹42 कर दी। इससे हमारे मार्जिन में 8% सुधार हुआ।
ब
- ब्रेक-ईवन
- वह बिंदु जहाँ आपकी कुल लागत और कुल आय बराबर हो जाती है। इससे आगे जाने पर आपको मुनाफा शुरू होता है।
- e.g. हमने मार्च में एक नया वेयरहाउस खोला था, जिससे फिक्स्ड कॉस्ट ₹50,000 बढ़ गई। पहले ₹2,000 प्रति यूनिट बिकने पर ₹500 प्रति यूनिट का मुनाफा था, लेकिन अब ब्रेक-ईवन तक पहुंचने के लिए हमें 100 यूनिट ज्यादा बेचनी पड़ रही है।
म
- मोटा मार्जिन
- विक्रय मूल्य और COGS के बीच का अंतर, जो उत्पाद की बुनियादी लाभकारी क्षमता दिखाता है। इसे प्रतिशत में भी व्यक्त किया जाता है।
- e.g. अगर आपने एक उत्पाद 1,500 रुपये में बेचा और उसका COGS 900 रुपये था, तो मोटा मार्जिन = 1,500 - 900 = 600 रुपये (40% मार्जिन)।
- मल्टी-चैनल
- एक ही प्रॉडक्ट को एक से ज्यादा प्लेटफॉर्म (जैसे अमेज़न, फ्लिपकार्ट, अपने वेबसाइट) पर बेचना। इससे रेवेन्यू बढ़ता है, लेकिन ऑर्डर मैनेजमेंट और इन्वेंटरी ट्रैकिंग मुश्किल हो जाती है।
- e.g. हमने 2023 में अमेज़न के अलावा फ्लिपकार्ट और अपने Shopify स्टोर पर भी बिक्री शुरू की। अमेज़न पर 60% रेवेन्यू था, लेकिन फ्लिपकार्ट पर 25% और Shopify पर 15%। इससे कुल बिक्री तो बढ़ी, लेकिन हर प्लेटफॉर्म के अलग-अलग फीस और रिटर्न पॉलिसी से सिरदर्द बढ़ गया।
य
- यूनिट इकॉनॉमिक्स
- एक यूनिट (एक उत्पाद) बेचने पर होने वाला मुनाफा और खर्च। इसमें उत्पादन लागत, शिपिंग, फीस, और मार्केटिंग सब शामिल होते हैं। अगर प्रति यूनिट मुनाफा ज्यादा है, तो बिजनेस स्केल करने लायक है।
- e.g. हमारे प्रोडक्ट की लागत ₹150 है, अमेज़न फीस ₹45, और शिपिंग ₹20 लगती है। कुल लागत ₹215 हुई। हम ₹300 में बेचते हैं, तो प्रति यूनिट मुनाफा ₹85 है। लेकिन अगर फीस बढ़े तो मार्जिन घट जाएगा।
र
- रेफरल फीस
- Amazon द्वारा विक्रेता से ली जाने वाली फीस, जो उत्पाद के विक्रय मूल्य का एक निश्चित प्रतिशत होती है। यह फीस उत्पाद श्रेणी के अनुसार अलग-अलग होती है।
- e.g. अगर आप एक किताब 300 रुपये में बेचते हैं और रेफरल फीस 15% है, तो फीस = 45 रुपये।
- रिटर्न प्रोसेसिंग
- ग्राहक द्वारा लौटाए गए उत्पाद को वापस लेने, उसकी स्थिति चेक करने, रिफंड देने और इन्वेंट्री में वापस जोड़ने की प्रक्रिया। अमेज़न इस पर अतिरिक्त शुल्क लेता है, जो उत्पाद की स्थिति और रिटर्न कारण पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, अगर कोई ग्राहक "गलत आइटम" का रिटर्न देता है, तो रिटर्न प्रोसेसिंग फीस ₹60 होती है, जबकि "डैमेज्ड" के लिए ₹120 तक जाती है।
- e.g. पिछले महीने हमारे 12% ऑर्डर्स रिटर्न हुए, और रिटर्न प्रोसेसिंग फीस ₹4,200 आई। यही कारण है कि हमने प्रोडक्ट लिस्टिंग में बेहतर फोटोज और डिस्क्रिप्शन डाले।
ल
- लैंडेड कॉस्ट
- किसी प्रॉडक्ट की वो कुल लागत जो उसके मूल मूल्य, आयात शुल्क, कर, शिपिंग, बीमा और अन्य फीस को मिलाकर बनती है। यह वह रकम है जो आपको माल मिलने तक चुकानी पड़ती है।
- e.g. हमारा इंडिया से आयातित माल ₹800 प्रति यूनिट का था, लेकिन ₹120 शिपिंग, ₹45 कस्टम ड्यूटी और ₹35 जीएसटी जोड़ने के बाद लैंडेड कॉस्ट ₹1,000 प्रति यूनिट हो गई। इसी पर हमें 20% मार्जिन चाहिए था, वरना ₹200 प्रति यूनिट का घाटा होता।
- लाभ मार्जिन
- बिक्री के बाद बचने वाला पैसा, जो उत्पाद की लागत और बेचने वाले के खर्चों को घटाने के बाद बचता है। इसे प्रतिशत में दिखाया जाता है। अगर आपका उत्पाद ₹100 में बिकता है और उसकी लागत ₹60 है, तो लाभ मार्जिन 40% हुआ।
- e.g. मार्च में SKU B07X की लागत ₹85 थी और बिक्री ₹120 हुई। ₹35 का लाभ मार्जिन रहा, जो 29% है। इसी महीने दूसरे SKU का मार्जिन सिर्फ 15% था, इसलिए हमने उसकी मार्केटिंग बंद कर दी।
व
- विक्रय लागत (COGS)
- उत्पाद को बेचने के लिए सीधे खर्च किए गए धन, जैसे उत्पादन लागत, कच्चे माल, और सीधी श्रम लागत। इसमें शिपिंग या फीस शामिल नहीं होते।
- e.g. अगर आप एक टी-शर्ट 200 रुपये में खरीदते हैं और उसे 500 रुपये में बेचते हैं, तो COGS = 200 रुपये।
स
- सेटलमेंट
- विक्रेता के खाते में अमेज़न द्वारा धनराशि जमा करने की प्रक्रिया, जिसमें बिक्री आय, रिफंड, शुल्क और कर शामिल होते हैं। आमतौर पर हर 14 दिन में होता है, लेकिन बैंक और देश के आधार पर समय बदल सकता है। उदाहरण के लिए, अगर आपने ₹5,000 की बिक्री की और अमेज़न ने ₹300 का रेफरल शुल्क काट लिया, तो आपका सेटलमेंट ₹4,700 होगा।
- e.g. मार्च में हमारा सेटलमेंट ₹85,000 आया, लेकिन स्टोरेज फीस ₹12,500 काटने के बाद सिर्फ ₹72,500 बचा। यही कारण है कि अगले महीने हमने इन्वेंट्री कम कर दी।
- स्टोरेज फीस
- अमेज़न वेयरहाउस में रखे गए इन्वेंट्री पर लिया जाने वाला शुल्क, जो उत्पाद के आकार, वजन और स्टोर किए गए समय पर निर्भर करता है। जनवरी से सितंबर तक स्टोरेज फीस कम होती है, जबकि अक्टूबर से दिसंबर (हॉलिडे सीजन) में दोगुनी हो जाती है। उदाहरण के लिए, 100 ग्राम के 500 यूनिट्स जनवरी में ₹1.2 प्रति यूनिट स्टोरेज फीस लगती है, लेकिन दिसंबर में ₹2.4 प्रति यूनिट।
- e.g. हमारे SKU B07X को जनवरी में ₹180 स्टोरेज फीस लगी, लेकिन फरवरी में हमने इन्वेंट्री 30% घटा दी तो मार्च में सिर्फ ₹90 आई। यही कारण है कि हम हर तिमाही में स्टॉक रिव्यू करते हैं।