Shopify पर मुनाफ़ा गिनना है? बस अपने SKU का असली खर्च निकालिए
हर बेचे गए प्रोडक्ट का असली मुनाफ़ा निकालने का तरीका। प्लेटफ़ॉर्म फ़ीस, शिपिंग, ऐड स्पेंड, रिफ़ंड सब जोड़कर देखें कि आपका असली मुनाफ़ा कितना बचता है।
Shopify पर हर SKU का असली मुनाफ़ा निकालने का तरीका
मान लीजिए आपने एक टी-शर्ट बेची जिसका आपने ₹400 में खरीदा। Shopify पर आपने ₹800 में बेचा। लगता है ₹400 मुनाफ़ा हुआ, लेकिन असल में ऐसा नहीं है।
पहले प्लेटफ़ॉर्म फ़ीस लगती है। Shopify प्लान के हिसाब से 2.9% + 30¢ प्रति ट्रांज़ैक्शन। अगर आपने ₹800 की बिक्री की तो ₹23.20 + 30¢ = ₹23.50 फ़ीस कट गई।
फिर पेमेंट गेटवे फ़ीस। अगर आप Razorpay इस्तेमाल करते हैं तो 2% + 18¢ प्रति ट्रांज़ैक्शन। ₹800 पर ₹16 + 18¢ = ₹16.18 और कट गए।
अब शिपिंग कॉस्ट। अगर आप ₹50 में शिपिंग देते हैं और ग्राहक ने फ्री शिपिंग लिया तो वह ₹50 आपका खर्च हुआ।
ऐड स्पेंड भी जोड़िए। अगर आपने ₹200 का फेसबुक ऐड चलाया जिसका 10% ही कन्वर्ज़न हुआ तो ₹20 प्रति बिक्री का ऐड खर्च हुआ।
और आखिर में रिफ़ंड। अगर 5% रेट से रिफ़ंड हुआ तो ₹400 का 5% = ₹20 और कट गया।
अब जोड़िए सब: ₹400 (प्रोडक्ट) + ₹23.50 (Shopify फ़ीस) + ₹16.18 (पेमेंट गेटवे) + ₹50 (शिपिंग) + ₹20 (ऐड) + ₹20 (रिफ़ंड) = ₹529.68।
मतलब ₹800 में बेचने पर आपका असली खर्च ₹529.68 हुआ। असली मुनाफ़ा = ₹800 - ₹529.68 = ₹270.32।
अगर आपने 100 टी-शर्ट बेचीं तो कुल मुनाफ़ा ₹27,032 हुआ, ना कि ₹40,000।
Shopify पर ऐसा कैलकुलेशन हर SKU का करना चाहिए। अगर आपका कोई SKU ₹500 में बिक रहा है लेकिन उसका असली मुनाफ़ा सिर्फ ₹100 निकल रहा है तो समझ लीजिए वह SKU बंद कर दीजिए।
Gomarginify जैसे टूल से आप हर दिन अपने हर SKU का असली मुनाफ़ा देख सकते हैं। इसमें अमेज़न, Shopify, ईबी, ईटसी सब मार्केटप्लेस के डेटा को जोड़कर कैलकुलेशन होता है। आपको सिर्फ अपने प्रोडक्ट कॉस्ट, शिपिंग, ऐड स्पेंड, और रिफ़ंड रेट डालने होते हैं।
अगर आप अमेज़न पर भी बेचते हैं तो वहां की फ़ीस अलग होती है। अमेज़न पर रेफरल फ़ीस 6% से 45% तक होती है, प्लस FBA फ़ीस अगर आप FBA इस्तेमाल करते हैं। अमेज़न पर 2025 में प्रॉफिट हिस्ट्री देखें तो पता चलेगा कि ज्यादातर सेलर्स का मुनाफ़ा 10-20% के बीच ही रहता है।
Shopify पर अमेज़न से ज्यादा मुनाफ़ा कमाने के लिए आपको अपने ऐड स्पेंड पर कंट्रोल रखना होगा। अमेज़न पर तो ऐड स्पेंड प्लेटफ़ॉर्म खुद मैनेज करता है, लेकिन Shopify पर आपको खुद ही अपने ऐड बजट को ट्रैक करना होता है।
अमेज़न प्रॉफिट बनाम Shopify प्रॉफिट: कौन सा बेहतर है?
अमेज़न पर बेचने वाले सेलर्स का औसत मुनाफ़ा 10-20% रहता है। अमेज़न पर रेफरल फ़ीस, FBA फ़ीस, रिटर्न फ़ीस सब मिलाकर 25-35% तक खर्च हो जाता है। अमेज़न प्रॉफिट हिस्ट्री में देखा जा सकता है कि 2020 से लेकर 2025 तक अमेज़न पर सेलर्स का मुनाफ़ा घटता-बढ़ता रहा है।
Shopify पर अगर आप खुद अपने शिपिंग और मार्केटिंग मैनेज करते हैं तो आपका खर्च कम हो सकता है। अमेज़न पर तो FBA फ़ीस ₹50-100 प्रति प्रोडक्ट लगती है, लेकिन Shopify पर आप ₹30 में भी शिपिंग कर सकते हैं अगर आप खुद पैकेजिंग करते हैं।
अमेज़न नॉन-प्रॉफिट जॉब्स वाले लोग अक्सर कहते हैं कि अमेज़न पर मुनाफ़ा कम है, लेकिन असल में अमेज़न पर स्केल करना आसान है। अमेज़न पर अगर आपका एक SKU चल गया तो आप 1000 यूनिट्स बेच सकते हैं। Shopify पर आपको खुद मार्केटिंग करनी होती है, इसलिए स्केल करना मुश्किल होता है।
अमेज़न प्रॉफिट ग्राफ देखें तो पता चलेगा कि अमेज़न पर सेलर्स का मुनाफ़ा साल-दर-साल घटता-बढ़ता रहता है। 2020 में अमेज़न पर मुनाफ़ा ज्यादा था क्योंकि那时候 competition कम था। 2025 में अमेज़न पर competition ज्यादा है, इसलिए मुनाफ़ा कम हो रहा है।
Shopify पर अगर आप अपने SKU का असली कॉस्ट निकालना चाहते हैं तो आपको अपने हर खर्च को ट्रैक करना होगा। अमेज़न पर तो प्लेटफ़ॉर्म खुद आपके खर्च को मैनेज करता है, लेकिन Shopify पर आपको खुद ही अपने ऐड स्पेंड, शिपिंग कॉस्ट, और रिफ़ंड रेट को ट्रैक करना होता है।
अगर आप अमेज़न और Shopify दोनों पर बेचते हैं तो आपको दोनों प्लेटफ़ॉर्म के खर्च को अलग-अलग ट्रैक करना होगा। अमेज़न पर आपका SKU ₹600 में बिक रहा है और Shopify पर ₹700 में, लेकिन अमेज़न पर आपका असली मुनाफ़ा ₹150 है और Shopify पर ₹200 है, तो Shopify वाला SKU ज्यादा फायदेमंद है।
SKU कॉस्ट निकालने का सही तरीका: अमेज़न, Shopify, और दूसरे मार्केटप्लेस के लिए
SKU कॉस्ट निकालने का मतलब सिर्फ प्रोडक्ट की कीमत नहीं है। आपको हर उस खर्च को जोड़ना होता है जो उस SKU से जुड़ा है।
पहले प्रोडक्ट कॉस्ट। अगर आपने ₹400 में टी-शर्ट खरीदी तो वह ₹400 हुई।
फिर प्लेटफ़ॉर्म फ़ीस। अमेज़न पर रेफरल फ़ीस 15% मान लीजिए तो ₹60 कट गए। Shopify पर अगर आप Basic प्लान इस्तेमाल करते हैं तो 2.9% + 30¢ प्रति ट्रांज़ैक्शन। ₹700 पर ₹20.30 + 30¢ = ₹20.60 कट गए।
पेमेंट गेटवे फ़ीस। अमेज़न पर पेमेंट गेटवे फ़ीस 2.9% + 30¢ होती है। ₹700 पर ₹20.30 + 30¢ = ₹20.60 कट गए। Shopify पर अगर आप Razorpay इस्तेमाल करते हैं तो 2% + 18¢ प्रति ट्रांज़ैक्शन। ₹700 पर ₹14 + 18¢ = ₹14.18 कट गए।
शिपिंग कॉस्ट। अमेज़न पर FBA फ़ीस ₹50-100 प्रति प्रोडक्ट होती है। Shopify पर अगर आप खुद शिपिंग करते हैं तो ₹30-50 प्रति प्रोडक्ट लगता है।
ऐड स्पेंड। अमेज़न पर अगर आपने ₹500 का ऐड चलाया और 10% कन्वर्ज़न हुआ तो ₹50 प्रति बिक्री का ऐड खर्च हुआ। Shopify पर अगर आप फेसबुक ऐड चलाते हैं तो ₹200 का ऐड चलाने पर ₹20 प्रति बिक्री खर्च हुआ।
रिफ़ंड। अमेज़न पर 5% रिफ़ंड रेट मान लीजिए तो ₹35 कट गए। Shopify पर भी 5% रिफ़ंड रेट मान लीजिए तो ₹35 कट गए।
अब जोड़िए सब: ₹400 (प्रोडक्ट) + ₹60 (अमेज़न रेफरल) + ₹20.60 (अमेज़न पेमेंट) + ₹50 (FBA) + ₹50 (ऐड) + ₹35 (रिफ़ंड) = ₹615.60।
अगर अमेज़न पर आपने ₹700 में बेचा तो असली मुनाफ़ा = ₹700 - ₹615.60 = ₹84.40।
Shopify पर जोड़िए: ₹400 (प्रोडक्ट) + ₹20.60 (Shopify फ़ीस) + ₹14.18 (Razorpay) + ₹40 (शिपिंग) + ₹20 (ऐड) + ₹35 (रिफ़ंड) = ₹529.78।
Shopify पर ₹700 में बेचने पर असली मुनाफ़ा = ₹700 - ₹529.78 = ₹170.22।
मतलब अमेज़न पर ₹84.40 और Shopify पर ₹170.22 मुनाफ़ा हुआ। इसलिए Shopify वाला SKU ज्यादा फायदेमंद है।
Gomarginify जैसे टूल से आप हर दिन अपने हर SKU का असली कॉस्ट और मुनाफ़ा देख सकते हैं। इसमें अमेज़न, Shopify, ईबी, ईटसी सब मार्केटप्लेस के डेटा को जोड़कर कैलकुलेशन होता है। आपको सिर्फ अपने प्रोडक्ट कॉस्ट, शिपिंग, ऐड स्पेंड, और रिफ़ंड रेट डालने होते हैं।
अगर आप अमेज़न प्रॉफिट शेयरिंग देखना चाहते हैं तो अमेज़न पर सेलर्स को मिलने वाला प्रॉफिट अमेज़न के हिसाब से तय होता है। अमेज़न पर अगर आप FBA इस्तेमाल करते हैं तो अमेज़न प्रॉफिट शेयरिंग का हिस्सा ज्यादा होता है क्योंकि अमेज़न खुद आपके इन्वेंटरी को मैनेज करता है।
मार्जिन सेलर बनाम अमेज़न सेलर: कौन ज्यादा कमाता है?
मार्जिन सेलर वो होते हैं जो अपने प्रोडक्ट की कीमत खुद तय करते हैं और अपने मार्जिन पर ध्यान देते हैं। अमेज़न सेलर वो होते हैं जो अमेज़न के प्लेटफ़ॉर्म पर बेचते हैं और अमेज़न की फ़ीस के हिसाब से अपने मुनाफ़े को मैनेज करते हैं।
मार्जिन सेलर का मतलब है कि आप अपने प्रोडक्ट की कीमत खुद तय करते हैं और अपने मार्जिन को बचाने की कोशिश करते हैं। मार्जिन सेलर अक्सर Shopify, ईबी, ईटसी जैसे प्लेटफ़ॉर्म इस्तेमाल करते हैं जहां उन्हें अपने मार्जिन पर ज्यादा कंट्रोल मिलता है।
अमेज़न सेलर का मतलब है कि आप अमेज़न के प्लेटफ़ॉर्म पर बेचते हैं और अमेज़न की फ़ीस के हिसाब से अपने मुनाफ़े को मैनेज करते हैं। अमेज़न सेलर को अमेज़न प्रॉफिट हिस्ट्री और अमेज़न प्रॉफिट ग्राफ से अपने मुनाफ़े का अंदाज़ा मिलता है।
मार्जिन सेलर बनाम अमेज़न सेलर में अंतर समझने के लिए एक उदाहरण लेते हैं। मान लीजिए आपने एक टी-शर्ट बनाई जिसकी कॉस्ट ₹300 है।
मार्जिन सेलर: आप टी-शर्ट को ₹600 में बेचते हैं। Shopify पर आपने ₹600 में बेचा। Shopify फ़ीस ₹17.40 + 30¢ = ₹17.70, पेमेंट गेटवे फ़ीस ₹12 + 18¢ = ₹12.18, शिपिंग ₹40, ऐड स्पेंड ₹15, रिफ़ंड ₹30। कुल खर्च = ₹300 + ₹17.70 + ₹12.18 + ₹40 + ₹15 + ₹30 = ₹414.88। असली मुनाफ़ा = ₹600 - ₹414.88 = ₹185.12। मार्जिन = 30.85%।
अमेज़न सेलर: आप टी-शर्ट को ₹600 में बेचते हैं। अमेज़न पर रेफरल फ़ीस 15% = ₹90, पेमेंट गेटवे फ़ीस ₹17.40 + 30¢ = ₹17.70, FBA फ़ीस ₹70, ऐड स्पेंड ₹25, रिफ़ंड ₹30। कुल खर्च = ₹300 + ₹90 + ₹17.70 + ₹70 + ₹25 + ₹30 = ₹532.70। असली मुनाफ़ा = ₹600 - ₹532.70 = ₹67.30। मार्जिन = 11.22%।
मतलब मार्जिन सेलर का मार्जिन 30.85% है जबकि अमेज़न सेलर का मार्जिन सिर्फ 11.22% है। इसलिए मार्जिन सेलर ज्यादा कमाते हैं।
लेकिन अमेज़न सेलर्स को अमेज़न पर ज्यादा स्केल करने का मौका मिलता है। अमेज़न पर अगर आपका एक SKU चल गया तो आप 10,000 यूनिट्स बेच सकते हैं। Shopify पर आपको खुद मार्केटिंग करनी होती है, इसलिए स्केल करना मुश्किल होता है।
अगर आप अमेज़न नॉन-प्रॉफिट जॉब्स से बचना चाहते हैं तो आपको अपने मार्जिन पर ध्यान देना होगा। अमेज़न पर तो आपका मार्जिन कम हो जाता है, लेकिन Shopify पर आप अपने मार्जिन को बचा सकते हैं।
Gomarginify जैसे टूल से आप हर दिन अपने हर SKU का असली मार्जिन देख सकते हैं। इसमें अमेज़न, Shopify, ईबी, ईटसी सब मार्केटप्लेस के डेटा को जोड़कर कैलकुलेशन होता है। आपको सिर्फ अपने प्रोडक्ट कॉस्ट, शिपिंग, ऐड स्पेंड, और रिफ़ंड रेट डालने होते हैं।
2025 में Shopify पर मुनाफ़ा बढ़ाने के 3 तरीके
पहला तरीका है अपने ऐड स्पेंड को कंट्रोल करना। Shopify पर अगर आप फेसबुक, गूगल, टिकटॉक जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर ऐड चलाते हैं तो आपको अपने ऐड स्पेंड को ट्रैक करना होगा। अमेज़न पर तो ऐड स्पेंड प्लेटफ़ॉर्म मैनेज करता है, लेकिन Shopify पर आपको खुद ही अपने ऐड बजट को मैनेज करना होता है।
मान लीजिए आपने ₹10,000 का फेसबुक ऐड चलाया और उससे 500 बिक्री हुई। अगर आपका ऐड स्पेंड प्रति बिक्री ₹20 हुआ तो आपको देखना होगा कि क्या यह लाभदायक है। अगर आपका प्रति बिक्री मुनाफ़ा ₹150 है तो ₹20 ऐड स्पेंड ठीक है। लेकिन अगर आपका प्रति बिक्री मुनाफ़ा सिर्फ ₹50 है तो ₹20 ऐड स्पेंड बहुत ज्यादा है।
दूसरा तरीका है अपने शिपिंग कॉस्ट को कम करना। Shopify पर अगर आप खुद शिपिंग करते हैं तो आप ₹30-50 प्रति प्रोडक्ट में शिपिंग कर सकते हैं। अमेज़न पर FBA फ़ीस ₹50-100 प्रति प्रोडक्ट होती है। इसलिए अगर आप खुद शिपिंग करते हैं तो आप अपने शिपिंग कॉस्ट को कम कर सकते हैं।
तीसरा तरीका है अपने रिफ़ंड रेट को कम करना। अमेज़न पर रिफ़ंड रेट 5-10% रहता है जबकि Shopify पर रिफ़ंड रेट 3-7% रहता है। अगर आप अपने प्रोडक्ट की क्वालिटी पर ध्यान देते हैं और ग्राहकों को अच्छी सर्विस देते हैं तो आप अपने रिफ़ंड रेट को कम कर सकते हैं।
Gomarginify जैसे टूल से आप हर दिन अपने हर SKU का रिफ़ंड रेट, ऐड स्पेंड, और शिपिंग कॉस्ट ट्रैक कर सकते हैं। इससे आपको पता चलता है कि कौन सा SKU ज्यादा मुनाफ़ा दे रहा है और कौन सा बंद कर देना चाहिए।
अगर आप अमेज़न पर भी बेचते हैं तो अमेज़न प्रॉफिट ग्राफ देखें। अमेज़न पर 2025 में मुनाफ़ा कम हो रहा है क्योंकि competition बढ़ रहा है। इसलिए अगर आप अमेज़न पर बेचते हैं तो आपको अपने मार्जिन पर ज्यादा ध्यान देना होगा।
अमेज़न प्रॉफिट हिस्ट्री और ग्राफ से सीखें: कब बेचना है और कब रुकना है
अमेज़न प्रॉफिट हिस्ट्री देखें तो पता चलेगा कि 2020 से लेकर 2025 तक अमेज़न पर सेलर्स का मुनाफ़ा घटता-बढ़ता रहा है। 2020 में अमेज़न पर competition कम था इसलिए मुनाफ़ा ज्यादा था। 2021-2022 में competition बढ़ा और मुनाफ़ा घट गया। 2023-2024 में अमेज़न ने अपनी फ़ीस बढ़ाई जिससे और सेलर्स का मुनाफ़ा घट गया।
अमेज़न प्रॉफिट ग्राफ देखें तो पता चलेगा कि अमेज़न पर सेलर्स का औसत मुनाफ़ा 10-20% के बीच रहता है। अमेज़न पर अगर आपका मुनाफ़ा 5% से कम हो रहा है तो समझ लीजिए कि आपको अपने बिज़नेस मॉडल पर फिर से सोचना होगा।
Shopify पर अगर आप अमेज़न प्रॉफिट हिस्ट्री से तुलना करें तो पता चलेगा कि Shopify पर सेलर्स का मुनाफ़ा ज्यादा होता है। Shopify पर सेलर्स का औसत मुनाफ़ा 20-30% रहता है। इसलिए अगर आप अमेज़न नॉन-प्रॉफिट जॉब्स से बचना चाहते हैं तो Shopify पर बेचना ज्यादा फायदेमंद है।
अमेज़न पर अगर आप FBA इस्तेमाल करते हैं तो अमेज़न प्रॉफिट शेयरिंग का हिस्सा ज्यादा होता है। अमेज़न FBA सेलर्स को अमेज़न प्रॉफिट ग्राफ में ज्यादा वेटेज देता है क्योंकि अमेज़न खुद उनके इन्वेंटरी को मैनेज करता है।
लेकिन अमेज़न पर competition बढ़ रहा है इसलिए अमेज़न पर बेचना मुश्किल हो रहा है। अमेज़न पर अगर आपका एक SKU बंद हो गया तो आपको अपने पूरे बिज़नेस मॉडल पर फिर से सोचना होगा।
Shopify पर अगर आपका एक SKU बंद हो गया तो आप दूसरे SKU पर शिफ्ट हो सकते हैं। Shopify पर आपको अमेज़न जैसे प्लेटफ़ॉर्म की तरह dependency नहीं होती।
Gomarginify जैसे टूल से आप हर दिन अपने हर SKU का प्रॉफिट ग्राफ देख सकते हैं। इसमें अमेज़न, Shopify, ईबी, ईटसी सब मार्केटप्लेस के डेटा को जोड़कर कैलकुलेशन होता है। आपको सिर्फ अपने प्रोडक्ट कॉस्ट, शिपिंग, ऐड स्पेंड, और रिफ़ंड रेट डालने होते हैं।
अगर आप अमेज़न प्रॉफिट हिस्ट्री देखना चाहते हैं तो अमेज़न सेलर सेंट्रल में जाकर अपने SKU का प्रॉफिट हिस्ट्री देख सकते हैं। अमेज़न पर अगर आपका मुनाफ़ा 5% से कम हो रहा है तो समझ लीजिए कि आपको अपने SKU की कीमत बढ़ानी होगी या फिर उस SKU को बंद कर देना होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Shopify पर SKU कॉस्ट निकालने का सबसे आसान तरीका क्या है?
Shopify पर SKU कॉस्ट निकालने का सबसे आसान तरीका है अपने हर खर्च को ट्रैक करना। प्रोडक्ट कॉस्ट, प्लेटफ़ॉर्म फ़ीस, पेमेंट गेटवे फ़ीस, शिपिंग कॉस्ट, ऐड स्पेंड, और रिफ़ंड सब जोड़िए। अगर आप Gomarginify जैसे टूल इस्तेमाल करते हैं तो यह सब अपने आप कैलकुलेट हो जाता है। आपको सिर्फ अपने डेटा को अपलोड करना होता है।
अमेज़न पर रेफरल फ़ीस कितनी होती है और कैसे कैलकुलेट करें?
अमेज़न पर रेफरल फ़ीस प्रोडक्ट कैटेगरी के हिसाब से 6% से 45% तक होती है। ज्यादातर कैटेगरी में 15% रेफरल फ़ीस होती है। अगर आपने ₹1000 में कोई प्रोडक्ट बेचा तो अमेज़न रेफरल फ़ीस ₹150 होगी। FBA फ़ीस अलग से लगती है जो प्रोडक्ट के साइज़ और वज़न पर निर्भर करती है।
Shopify पर ऐड स्पेंड को कैसे ट्रैक करें जिससे मुनाफ़ा बढ़े?
Shopify पर ऐड स्पेंड ट्रैक करने के लिए सबसे पहले अपने फेसबुक, गूगल, टिकटॉक जैसे प्लेटफ़ॉर्म के ऐड मैनेजर में जाएं। हर ऐड कैम्पेन के लिए प्रति बिक्री कॉस्ट निकालिए। अगर आपका प्रति बिक्री ऐड स्पेंड ₹20 है और आपका प्रति बिक्री मुनाफ़ा ₹50 है तो यह ठीक है। लेकिन अगर प्रति बिक्री मुनाफ़ा सिर्फ ₹15 है तो आपको ऐड स्पेंड कम करना होगा। Gomarginify जैसे टूल से आप हर दिन अपने ऐड स्पेंड और मुनाफ़े को ट्रैक कर सकते हैं।
अमेज़न प्रॉफिट हिस्ट्री 2025 में कैसी है? क्या अब अमेज़न पर बेचना फायदेमंद है?
2025 में अमेज़न पर competition बहुत ज्यादा है इसलिए ज्यादातर सेलर्स का मुनाफ़ा 10-15% के बीच है। अमेज़न ने अपनी फ़ीस बढ़ाई है और FBA फ़ीस भी महंगी हो गई है। अगर आप अमेज़न पर बेचते हैं तो आपको अपने मार्जिन पर ज्यादा ध्यान देना होगा। अमेज़न नॉन-प्रॉफिट जॉब्स से बचने के लिए आपको अपने SKU की कीमत बढ़ानी होगी या फिर अपने खर्च को कम करना होगा।
हर मार्केटप्लेस पर अपना असली लाभ ट्रैक करें
Shopify पर हर SKU का असली मुनाफ़ा निकालना सीखें। प्लेटफ़ॉर्म फ़ीस, शिपिंग, रिफ़ंड, ऐड कॉस्ट सब जोड़कर देखें कि आपका मुनाफ़ा कितना बचता है। अमेज़न प्रॉफिट, अमेज़न नॉन-प्रॉफिट जॉब्स, और अमेज़न प्रॉफिट हिस्ट्री से तुलना करें।
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